धर्म
Mahakaleshwar Mandir: बिना भस्म आरती क्यों नहीं मिलती महाकाल की पूर्ण कृपा? जानिए धार्मिक रहस्य और मान्यता
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क्या है भस्म चढ़ाने की मान्यताएं?
वैराग्य और मृत्यु को जीवन का अंतिम सच माना गया है, और यही भाव भस्म आरती के माध्यम से मिलता है. भगवान शिव को काल का भी नियंत्रक कहा गया है. यह संसार क्षणिक है, यहां मौजूद हर वस्तु का अंत निश्चित है और अंततः सब कुछ राख में मिल जाएगा. भस्म उसी सत्य का प्रतीक है.
स्वयं भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म धारण कर यह बताते हैं कि भौतिक सुख और सुविधाएं स्थायी नहीं हैं, जबकि आत्मा कभी नष्ट नहीं होती.
भगवान शिव द्वारा भस्म धारण करने का अर्थ यह भी है कि उन्होंने मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली है, इसी कारण उन्हें महाकाल भी कहा जाता है. भस्म आरती ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न होती है, जब महाकाल अपने निराकार स्वरूप में विराजमान होते हैं.